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Benefits of Asafoetida-हींग के लाभ

हींग के लाभ :

हींग जिसे इंग्लीश में asafoetida कहते हैं. यह भारतीय व्यंजन में बहुधा उपयोग होता है. दाल अथवा सब्जियों में छ्ौंक लगाते समय हींग डाल देने से उसकी खुसबू हर तरफ फैलती ही है साथ ही भोजन को और भी स्वास्थ्यवर्धक बना देता है. 

इसकी गंध बहुत ही तेज़ होती है. इसकी तेज़ गंध ही इसकी शक्ति की पहचान है. जितना तेज़ गंध उतना कड़क हींग. इसलिए इसे काँच के बर्तन में रखना चाहिए और ढक्कन अच्छी तरह बंद कर देना छाईए ताकि हवा अंदर ना जा सके.  आज कल बाज़ार में जो हींग उपलब्ध है उनमें से अधिकाँशतः मिलावती होते हैं. हींग को आटे में मिलाकर उसे प्लास्टिक के डब्बे में बंद कर दिया जाता है. हींग को आटे में इसलिए मिलाते हैं ताकि इसकी गंध अधिक समय तक टीका रहे.

अध्यात्म मार्ग के पथिक को प्याज, लहसुन के साथ हींग से भी परहेज़ रखना चाहिए. हींग को तामसी पदार्थ की श्रेणी में रखा गया है.

हींग को प्रायः सब्जी अथवा दाल के छौंक हेतु प्रयोग में लाते हैं. प्रति व्यक्ति दो सरसों के दाने के बराबर ही हींग का प्रयोग करना चाहिए इससे अधिक नहीं अथवा लाभ के बजाय हानि होती है और गंभीर बीमारी हो जाती है. 

हींग से वायु / गॅस, अनावश्यक डकार, पाचन संबंधी समस्या आदि दूर होते हैं. आँतों में पाचक रस बनाने में मदद करता है जिससे भोजन आसानी से पच जाता है.

 

hing-Asafoetida

 

जिनकी आँतों की तकलीफ़ हो, गॅस की तकलीफ़ हो, ज़रूरत से ज़्यादा डकार आता हो, आँतों का आकार बढ़ गया हो या आँत अपने जगह से खिसक गये हों उन्हें निम्न विधि से हींग का सेवन करना चाहिए :

प्रतिदिन केले, गुड़, सेब (के एक टुकड़े) पर सरसों के दो दानों के बराबर हींग छिड़क कर सेवन करें. ऐसा लगातार तीन माह तक करें. आपकी समस्या जड़ से समाप्त हो जाएगी. 

ध्यान रहे दो सरसों के दानों के बराबर ही हींग का उपयोग करें अन्यथा लाभ के बजाय हानि ही होगी.

admin 30.11.2016 0 260
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